aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "personal"
ख़याल अपना मिज़ाज अपना पसंद अपनी कमाल क्या हैजो यार चाहे वो हाल अपना बना के रखना कमाल ये है
यूँही रोज़ मिलने की आरज़ू बड़ी रख-रखाव की गुफ़्तुगूये शराफ़तें नहीं बे-ग़रज़ इसे आप से कोई काम है
किस तरह तर्क-ए-मुद्दआ कीजेजब कोई अपना मुद्दआ' ही नहीं
मुझे पहले तो लगता था कि ज़ाती मसअला हैमैं फिर समझा मोहब्बत काएनाती मसअला है
हुजूम-ए-शोख़ में ये दिल ही बे-ग़रज़ निकलाचलो कोई तो हरीफ़ाना चल रहा है मियाँ
ग़म-ए-दुनिया ग़म-ए-जाँ से जुदा होने लगा था'हसन' हम ने मगर दोनों को यकजा कर दिया है
अभी मा'लूम नहीं कितने हैं ज़ाती अस्बाबकितनी वजहें हैं समाजी मिरी तन्हाई की
बिछड़ने का इरादा है तो मुझ से मशवरा कर लोमोहब्बत में कोई भी फ़ैसला ज़ाती नहीं होता
होगा क्या गर बोल उट्ठे ग़ैर बातों में मिरीफिर तबीअत मेरी ऐ बेदाद गर बट जाएगी
फ़रेब दे कर निकाले मतलब सिखाए तहक़ीर-ए-दीन-ओ-मज़हबमिटा दे आख़िर को वज़-ए-मिल्लत नुमूद-ए-ज़ाती को गर बढ़ा दे
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