aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "policy"
मस्लहत ने कर दिया दोनों में पैदा इख़्तिलाफ़वर्ना फ़ितरत का बुरा तू भी नहीं मैं भी नहीं
नज़र भी आए जो ज़ुल्फ़-ए-पेचाँ तो समझें ये कोई पालिसी हैइलेक्ट्रिक लाईट उस को समझें जो बर्क़-वश कोई कोई दे
कभी यूँ मिलें कोई मस्लहत कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न होमुझे अपनी कोई ख़बर न हो तुझे अपना कोई पता न हो
ख़ामोशी ही में हम ने देखी है मस्लहत अबहर यक से हाल दिल का मुद्दत कहा ज़बाँ से
तुम्हारी पॉलीसी का हाल कुछ खुलता नहीं साहबहमारी पॉलीसी तो साफ़ है ईमाँ-फ़रोशी की
इस ज़िंदगी के साथ बुज़ुर्गों ने दी हमेंइक ऐसी मस्लहत जो शर-अंगेज़ अब भी है
बस तेरे लिए उदास आँखेंउफ़ मस्लहत ना-शनास आँखें
हर चंद मस्लहत का तक़ाज़ा कुछ और थाआईना हर किसी को दिखाता रहा हूँ मैं
अमीर-ए-शहर का हुस्न-ए-तदब्बुररक़ीबों को भी अपना यार जाना
ये मस्लहत नहीं है तो फिर उन के सामनेख़ामोश क्यूँ खड़े हो गुनहगार की तरह
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