aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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हम ने अल्फ़ाज़ को आइना कर दियाछपने वाले ग़ज़ल में चमक जाएँगे
इस माह-ए-चारदह का छपे इश्क़ क्यूँके आहअब तो तमाम शहर में मशहूर हो गया
एक रिसाला पढ़ते पढ़ते उस की आँखें भर आईंउस में मेरा शे'र छपा हो ऐसा भी हो सकता है
तिरा भी नाम छपा वज्ह-ए-मर्ग-ए-आशिक़ मेंये देख बे-ख़बरे यूँ ख़बर बनाते हैं
तारीख़ आ चुकी है उधर कार्ड छप गएअब कब कहेगी तुझ को वो लड़का नहीं पसंद
क्या पाया दीवान छपा करलो रद्दी के मोल बिका है
बे-सबब घर से निकल कर आ गए बाज़ार मेंआइना देखा नहीं तस्वीर छपवाने लगे
अपनी गिरह से कुछ न मुझे आप दीजिएअख़बार में तो नाम मिरा छाप दीजिए
छपा हुआ नहीं तुझ से दिल-ए-तबाह का हालये कम नहीं कि तिरे रंज को बचा रक्खा
मिरी शनाख़्त की ख़ातिर छपी मिरी तस्वीरन जीते-जी सही मर के ख़बर में आ गया हूँ
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