aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "pur"
फ़त्ह-बाग़ी ने नसर-पूरी हैं बल्किसिंध में भी हैदराबादी हैं हम
तक़दीर जितना चाहे मुझे दर-ब-दर करेमिट्टी से ख़ू न जाएगी बुर्हान-पूर की
वो जो गुटका पारे का मुँह में ले पड़े उड़ते फिरते हैं जोगी-जीसो तो भर्तपुर से उदास हो चले आए क़िला-ए-दैर से
पुर किया करती है जगह ख़ालीचीज़ बेकार भी ज़रूरी है
पुर है दामन चमन का ख़ारों सेदम उलझता है इन बहारों से
पुर-ग़ुरूर ओ पुर-तकब्बुर पुर-जफ़ा ओ पुर-सितमपुर-फ़रेब ओ पुर-दग़ा पुर-मक्र ओ पुर-फ़न आप हैं
पूजा है शब-ओ-रोज़ तिरे हुस्न का पैकरसाधू कई जपते रहे माला मिरे आगे
पुर है बाज़ार-ए-हुसन चेहरों सेजाने किस किस की आबरू है यहाँ
दीदा-ए-अहल-ए-दर्द में 'पुरनम'अश्क दिल की पुकार होता है
ज़ुल्फ़-ए-पुर-पेच से जो दिल उलझाबीच में रख़ पड़ा सफ़ाई की
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