aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "recording"
मेरा सर हाज़िर है लेकिन मेरा मुंसिफ़ देख लेकर रहा है मेरी फ़र्द-ए-जुर्म को तहरीर कौन
तुम पर मैं सहीफ़ा-हा-ए-कोहनाइक ताज़ा किताब रख रहा हूँ
ख़ुद को माज़ी में रखूँ हाल में रहते हुए भीनए वक़्तों के ख़यालात न लिखने पाऊँ
फ़ज़ा में वहशत-ए-संग-ओ-सिनाँ के होते हुएक़लम है रक़्स में आशोब-ए-जाँ के होते हुए
हज़ार ऐब ख़ुद अपने ही नाम में लिख करमैं तेरी राय हमा-गीर करता रहता हूँ
हयात-ए-रवाँ की हर इक ना-रवाईहम अपने लहू से रक़म कर रहे हैं
करता रहता था मज़ाहन वो बहुत सी बातेंअब रक़म करते रहे उस को फ़साना कर के
तुझे पाने की इक ख़्वाहिश में जानाँमैं कितने ज़ख़्म खाता जा रहा हूँ
हमारी शायरी 'पर्वाज़' ऐसा सिलसिला ठहरीकिया जिस में ख़यालों को रक़म आहिस्ता-आहिस्ता
है मिरी ख़ाना-नशीनी से ये घर घर मज़कूरख़ैल-ए-उश्शाक़ का सरकूब कहीं बैठ रहा
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