aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "sake"
कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्तसब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया
क़फ़स उदास है यारो सबा से कुछ तो कहोकहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले
उस के बदन को दी नुमूद हम ने सुख़न में और फिरउस के बदन के वास्ते एक क़बा भी सी गई
तेरे विसाल के लिए अपने कमाल के लिएहालत-ए-दिल कि थी ख़राब और ख़राब की गई
किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैंतुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो
वो जब आएगा तो फिर उस की रिफ़ाक़त के लिएमौसम-ए-गुल मिरे आँगन में ठहर जाएगा
अशआ'र मिरे यूँ तो ज़माने के लिए हैंकुछ शेर फ़क़त उन को सुनाने के लिए हैं
कहीं चाक-ए-जाँ का रफ़ू नहीं किसी आस्तीं पे लहू नहींकि शहीद-ए-राह-ए-मलाल का नहीं ख़ूँ-बहा उसे भूल जा
मुद्दत से कोई आया न गया सुनसान पड़ी है घर की फ़ज़ाइन ख़ाली कमरों में 'नासिर' अब शम्अ जलाऊँ किस के लिए
अब शहर में उस का बदल ही नहीं कोई वैसा जान-ए-ग़ज़ल ही नहींऐवान-ए-ग़ज़ल में लफ़्ज़ों के गुल-दान सजाऊँ किस के लिए
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