aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "sedition"
रुमूज़-ए-मस्लहत को ज़ेहन पर तारी नहीं करताज़मीर-ए-आदमिय्यत से मैं ग़द्दारी नहीं करता
मैं भी दुनिया की तरह जीने का हक़ माँगती हूँइस को ग़द्दारी का एलान न समझा जाए
रास्ता चल देख कर ये ख़ंजरों का शहर हैमुझ से चाहे कुछ भी कर ले ख़ुद से ग़द्दारी न कर
ग़दर के फूल सजाती हैं ऐसे बालों मेंसँभाल सकती हों जैसे भरे बदन अपने
वस्फ़ लिक्खे जो तिरे गोरे बदन के मैं नेहो गई ज़ाग़-ए-क़लम की वहीं मिंक़ार सफ़ेद
न सानी जब मज़ाक़-ए-हुस्न को अपना नज़र आयानिगाह-ए-शौक़ तक ले कर पयाम-ए-फ़ित्ना-गर आया
हिमाला की बुलंदी भी क़दम-बोसी को गर उतरेज़मीं वाले ज़मीं के साथ ग़द्दारी नहीं करते
छोड़ कर इश्क़-ए-सनम ज़ाहिद न हो मफ़्तून-ए-हूरकब यक़ीं लाता है दाना दूर की अफ़्वाह का
कभी ग़ैरों पे उँगली मत उठा ऐ रहबरान-ए-मुल्कतबाही देश की अपनों की ग़द्दारी में रक्खी है
हर जल्वा एक दफ़्तर आशोब-ए-रोज़गारहर ग़म्ज़ा इलम-ए-फ़ित्ना-गरी की किताब था
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