aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "shab"
गुल-ए-शब-ताब की ख़ुश्बू ले करअबलक़-ए-सुब्ह रवाना होगा
कोई भी 'साग़र' नहीं शादाँ यहाँईद क्या है और क्या शबरात है
नींद आती है 'कुमार' आख़िर-ए-शब आँखों मेंसोने लगता हूँ कि इक आह-ए-सहर उठती है
कट गई शब रोते रोते इंतिज़ार-ए-यार मेंआरज़ू एक एक दिल की अश्क बन कर बह गई
सूरज से है ख़िराज की तालिब सिपाह-ए-शामक्या फिर यज़ीद-ए-शब को कहीं सरवरी मिली
गूँज उट्ठी है ज़मीं-ता-आसमाँ इमरोज़-ओ-शबइस सदा-ए-हू में इक हर्फ़-ए-फ़ुग़ाँ मेरा भी है
लगे जब सुबह की कश्ती किनारे शबकिया करती है जाने क्या इशारे शब
रोज़-ओ-शब हम ने अश्क-बारी कीइंतिहा है ये बे-क़रारी की
शम्अ शब शे'र शफ़क़ शाम शबाब और शराबशोख़ी-ए-लब के हैं ऐ 'होश' फ़साने कितने
जब कली पर शबाब आता हैनिकहत-ए-गुल को ताब आता है
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