aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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ग़ुरूर-परवर अना का मालिक कुछ इस तरह के हैं नाम मेरेमगर क़सम से जो तुम ने इक नाम भी पुकारा तो मैं तुम्हारा
घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थेबहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला
वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ मेंजो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता
दौड़े है फिर हर एक गुल-ओ-लाला पर ख़यालसद-गुलसिताँ निगाह का सामाँ किए हुए
उठाया इक क़दम तू ने न उस तकबहुत अपने को माँदा कर लिया क्या
आह तूल-ए-अमल है रोज़-फ़ुज़ूँगरचे इक मुद्दआ नहीं होता
अँधियारे से एक किरन ने झाँक के देखा शरमाईधुँदली छब तो याद रही कैसा था चेहरा भूल गया
इक सत्र भी कभी न लिखी मैं ने तेरे नामपागल तुझी को याद भी आता रहा हूँ मैं
हम कि हैं तेरी दास्ताँ यकसरहम तिरी दास्ताँ के थे ही नहीं
कोई आँसू तेरे दामन पर गिरा करबूँद को मोती बनाना चाहता हूँ
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