aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "soft"
इतने ख़ाइफ़ क्यूँ रहते होहर आहट से डर जाते हो
जब शाख़ कोई हाथ लगाते ही चमन मेंशरमाए लचक जाए तो लगता है कि तुम हो
रात भर पिछली सी आहट कान में आती रहीझाँक कर देखा गली में कोई भी आया न था
तुझे भूल जाने की कोशिशें कभी कामयाब न हो सकींतिरी याद शाख़-ए-गुलाब है जो हवा चली तो लचक गई
अगर मुमकिन हो ले ले अपनी आहटख़बर दो हुस्न को मैं आ रहा हूँ
बाँस की खर्री खाट के ऊपर हर आहट पर कान धरेआधी सोई आधी जागी थकी दो-पहरी जैसी माँ
बाग़बाँ कलियाँ हों हल्के रंग कीभेजनी है एक कम-सिन के लिए
अपने साए पे पाँव रखता हूँछाँव छालों को नर्म लगती है
आहट अक़ब से आई और आगे निकल गईजो पहले देखना था वो अब देखता हूँ मैं
उफ़ ये सन्नाटा कि आहट तक न हो जिस में मुख़िलज़िंदगी में इस क़दर हम ने सुकूँ पाया न था
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