aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "tore"
जब जब मौसम झूमा हम ने कपड़े फाड़े शोर कियाहर मौसम शाइस्ता रहना कोरी दुनिया-दारी है
ये कश्मकश हुई कि गरेबाँ मिरा उधरटुकड़े हुआ और उस का दुपट्टा भी फट गया
आख़िर इसी बहाने मिला यार से 'नज़ीर'कपड़े बला से फट गए सौदा तो पट गया
सुकून कुछ तो मिला दिल का माजरा लिख करलिफ़ाफ़ा फाड़ दिया फिर तिरा पता लिख कर
पागल-पन तो देखो जिस दिन डोली उठने वाली थीअपने हाथ से तोड़ दिया इक दुल्हन ने शहनाई को
अल्लाह के महबूब की नज़रों में है ए'जाज़सीने में जो अल्लाह का घर था उसे ताका
चाक कर सीने को पहलू चीर डालयूँ ही कुछ हाल-ए-दिल-ए-मुज़्तर खुले
उस ने जब चाक किया वज्द में पैराहन-ए-जाँमैं ने भी नज़्र-ए-जुनूँ अपना गिरेबान किया
असा जब हज़रत-ए-मूसा ने मारा बहते पानी परतो पानी फट गया और सामने रस्ता निकल आया
बे-हिजाब-ए-नफ़्स था वो या कोई ग़ाफ़िल बदनपैरहन जो भी दिया है तार तार उस ने किया
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