aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "tulips"
फिर जिगर खोदने लगा नाख़ुनआमद-ए-फ़स्ल-ए-लाला-कारी है
उस की बातें कि गुल-ओ-लाला पे शबनम बरसेसब को अपनाने का उस शोख़ को जादू आए
जा चुका कारवान-लाला-ओ-गुलउड़ रहा है ग़ुबार चुप हो जा
तुम्हारे शहीदों में दाख़िल हुए हैंगुल-ओ-लाला-ओ-अर्ग़वाँ कैसे कैसे
तू बर्ग-ए-गया है न वही अहल-ए-ख़िरद राओ किश्त-ए-गुल-ओ-लाला ब-बख़शद ब-ख़रे चंद
लाला-ओ-गुल से तुझ को क्या निस्बतना-मुकम्मल से इस्तिआ'रे हैं
'सनाई' के अदब से मैं ने ग़व्वासी न की वर्नाअभी इस बहर में बाक़ी हैं लाखों लूलू-ए-लाला
वो दीवाने ज़माम-ए-लाला-ओ-गुल थाम लेते हैंजिन्हें मंसूब कर देती हैं वीराने तिरी आँखें
ये मौसम-ए-गुल गरचे तरब-ख़ेज़ बहुत हैअहवाल-ए-गुल-ओ-लाला ग़म-अंगेज़ बहुत है
ज़ीस्त है इस सहर-ओ-शाम से बेज़ार ओ ज़ुबूँलाला-ओ-गुल की तरह रंग-ए-क़बा दो हम को
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