आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "گل_خود_رو"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "گل_خود_رو"
ग़ज़ल
आह को बाद-ए-सबा दर्द को ख़ुशबू लिखना
है बजा ज़ख़्म-ए-बदन को गुल-ए-ख़ुद-रू लिखना
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल
ख़ुश-मज़ाक़ी शर्त हो जिस के नज़ारे के लिए
उस गुल-ए-ख़ुद-रू को यारब ज़ीनत-ए-वीराना कर
हरी चंद अख़्तर
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "گل_خود_رو"
ग़ज़ल
फ़ज़ा सहरा की आँखों से जो देखें हैं वो कह देंगे
गुल-ए-ख़ुद-रौ का आलम कम नहीं गुल-हा-ए-गुलशन से
हफ़ीज़ जौनपुरी
कहानी
اندر تاریکی کا جنگل اگنے لگا۔ اندھیرے کی غذا پا کر شکم خود رو جھاڑیوں کی طرح بڑھنا شروع ہو گیا۔...