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नज़्म
शिकवा
चाक इस बुलबुल-ए-तन्हा की नवा से दिल हों
जागने वाले इसी बाँग-ए-दरा से दिल हों
अल्लामा इक़बाल
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विषय
चाक
चाक शायरी
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रेख़्ता शब्दकोश
chaak
चाक چاک
फटा हुआ, कटा हुआ, चीरा हुआ, दरीदा, शिगाफ़ता
chiikh
चीख چِیکھ
एक तेज आवाज जो पीड़ा, भय और क्रोध की स्थिति में निकलती है, चिल्लाहट, हृदय-विदारक चीत्कार
chiiKH
चीख़ چِیخ
शोर, डर जाने पर निकलने वाली आवाज़,तीन और कर्णकटु ध्वनि, जैसे-इंजन की चीख,ज़ोरदार आवाज़ जो रंज-ओ-ग़म दर्द-ओ-क़ुरब या ख़ौफ़ की हालत में निकले ज़ोरदार आवाज़, चिल्लाहट,
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ग़ज़ल
बस-कि रोका मैं ने और सीने में उभरीं पै-ब-पै
मेरी आहें बख़िया-ए-चाक-ए-गरेबाँ हो गईं
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
वो जो अभी इस राहगुज़र से चाक-गरेबाँ गुज़रा था
उस आवारा दीवाने को 'जालिब' 'जालिब' कहते हैं
हबीब जालिब
नज़्म
लोग औरत को फ़क़त जिस्म समझ लेते हैं
लोग औरत की हर इक चीख़ को नग़्मा समझे
वो क़बीलों का ज़माना हो कि शहरों का रिवाज
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
फिर क्यूँ न चाक हो जो हैं ज़ोर-आज़माइयाँ
बाँधूंगा फिर दुपट्टा से उस बे-ख़ता के हाथ
निज़ाम रामपुरी
नज़्म
दोस्ती का हाथ
फ़क़त तुम्हीं को नहीं रंज-ए-चाक-दामानी
कि सच कहें तो दरीदा-लिबास हम भी हैं
अहमद फ़राज़
ग़ज़ल
हम पे ही ख़त्म नहीं मस्लक-ए-शोरीदा-सरी
चाक-ए-दिल और भी हैं चाक-ए-क़बा और भी हैं
