आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ".nif"
अत्यधिक संबंधित परिणाम ".nif"
अन्य परिणाम ".nif"
ग़ज़ल
है निस्फ़-ए-शब वो दीवाना अभी तक घर नहीं आया
किसी से चाँदनी रातों का क़िस्सा छिड़ गया होगा
जौन एलिया
नज़्म
दोस्ती का हाथ
अब उन की तीरा-नसीबी चराग़ चाहती है
जो लोग निस्फ़ सदी तक रहे अँधेरों में
अहमद फ़राज़
ग़ज़ल
इक उम्र चाहिए कि गवारा हो नीश-ए-इश्क़
रक्खी है आज लज़्ज़त-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर कहाँ
अल्ताफ़ हुसैन हाली
नज़्म
ऐ मेरे सारे लोगो
अब मिरे दूसरे बाज़ू पे वो शमशीर है जो
इस से पहले भी मिरा निस्फ़ बदन काट चुकी
अहमद फ़राज़
ग़ज़ल
पढ़ता नमाज़ मैं भी हूँ पर इत्तिफ़ाक़ से
उठता हूँ निस्फ़ रात को दिल की सदा के साथ
