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ग़ज़ल
शाम सुर्मा दर-गुलू है तो सहर पम्बा-ब-गोश
किस जहाँ में 'फ़ैज़' को तू ने ग़ज़ल-ख़्वाँ कर दिया
फ़ैज़ झंझानवी
ग़ज़ल
ग़ुरूर-ए-चाक-ए-जुनूँ 'फ़ैज़' सर-निगूँ न हुआ
हज़ार ख़ार-ए-मुग़ीलाँ बढ़े रफ़ू के लिए
फ़ैज़ झंझानवी
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रेख़्ता शब्दकोश
guru-bhaa.ii
गुरुभाई گُر بھائی
दो या दो से अधिक ऐसे व्यक्ति जिन्होंने एक ही गुरु से मंत्र लिया या शिक्षा पाई हो, एक ही गुरु के शिष्य
guruu-bhaa.ii
गुरू-भाई گُرُو بھائی
fellow disciple, followers or disciples of the same spiritual guide
muul na vaa suu.n bhai karo jo nar kare Guruur, jo nar saa.ii.n se Dare vaa se Daro zaruur
मूल न वा सूँ भय करो जो नर करे ग़ुरूर, जो नर साईं से डरे वा से डरो ज़रूर مُول نَہ وا سُوں بھَے کَرو جو نَر کَرے غُرُور، جو نَر سائِیں سے ڈَرے وا سے ڈَرو ضَرُور
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नज़्म
बहरा गोया
बुलंद-आहंगियों ने फाड़ डाले कान के पर्दे
हूँ वो मुतरिब जो ख़ुद अपनी सदा ही सुन नहीं सकता
परवेज़ शाहिदी
रुबाई
फ़क़ हो गया रंग मैं ने गुल-रू जो कहा या'नी उन को
तश्बीह का बार है उठाना मुश्किल नाज़ुक है मियाँ
मीर मेहदी मजरूह
ग़ज़ल
कभी था नाज़ ज़माने को अपने हिन्द पे भी
पर अब उरूज वो इल्म-ओ-कमाल-ओ-फ़न में नहीं
चकबस्त बृज नारायण
नज़्म
इश्क़ अपने मुजरिमों को पा-ब-जौलाँ ले चला
दार की रस्सियों के गुलू-बंद गर्दन में पहने हुए
गाने वाले हर इक रोज़ गाते रहे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
गर्दिश-ए-अय्याम हम पर मेहरबाँ कुछ कम नहीं
ये ज़मीं है ख़ूँ-तलब तो आसमाँ कुछ कम नहीं