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नज़्म
तराना-ए-क़ौमी
मर्हबा ऐ ख़ाक-ए-पाक-ए-किश्वर-ए-हिन्दोस्ताँ
यादगार-ए-अहद-ए-माज़ी है तू ऐ जान-ए-जहाँ
सफ़ीर काकोरवी
ग़ज़ल
जिसे मिल जाए ख़ाक-ए-पाक-ए-दश्त-ए-कर्बला 'परवीं'
पलट कर भी न देखे वो कभी इक्सीर की सूरत
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
शायरी के अनुवाद
सुर्मा तो ला के दीजो नसीम-ए-सहर मुझे
उस ख़ाक-ए-पाक का जो बनी रहगुज़ार-ए-दोस्त
ख़्वाजा हाफ़िज़ शीराज़ी
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dil-e-KHaak
दिल-ए-ख़ाक دِلِ خاک
ज़मीन का बीच; क़ब्र; पैग़म्बर; नेक बंदे; प्रकार की मछली
mai-e-haq
मय-ए-हक़ مَئے حَق
शराब-ए-मा'रिफ़त अर्थात् ज्ञान अथवा प्रेम की मदिरा, ईश्वर का प्रेम
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ग़ज़ल
हूरें ले जाएँगी पैराहन बसाने के लिए
इत्र ख़ाक-ए-पाक-ए-तैबा का तो ऐ अत्तार खींच
शाह अकबर दानापुरी
ग़ज़ल
ख़ाक-ए-'शिबली' से ख़मीर अपना भी उट्ठा है 'फ़ज़ा'
नाम उर्दू का हुआ है इसी घर से ऊँचा
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
शेर
ख़ाक-ए-'शिबली' से ख़मीर अपना भी उट्ठा है 'फ़ज़ा'
नाम उर्दू का हुआ है इसी घर से ऊँचा
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
नज़्म
पंजाब
हाँ उसी ख़ुश-वक़्त ख़ाक-ए-पाक के बेटे हो तुम
में न मानूँगा कि अक़्ल-ओ-फ़हम के हेटे हो तुम
अर्श मलसियानी
नज़्म
'महावीर'
ख़ाक-ए-पाक-ए-हिंद का गंज-ए-गिराँ-माया था तू
अह्ल-ए-दुनिया के लिए पैग़ाम-ए-हक़ लाया था तू
सुदर्शन कुमार वुग्गल
ग़ज़ल
पारसा हम-राह ले जाएँगे पिंदार-ए-अमल
हम तो अपने साथ उन की ख़ाक-ए-पा ले जाएँगे
बद्र-ए-आलम ख़ाँ आज़मी
ग़ज़ल
सुर्ख़ी के सबब ख़ूब खिला है गुल-ए-लाला
आरिज़ में लबों में कफ़-ए-दस्त ओ कफ़-ए-पा में