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ग़ज़ल
इस चमन के पेड़-पौदे हम ने सींचे ख़ून से
आप के हाथों में ये आरी कहाँ से आ गई
नफ़ीसा सुल्ताना अंना
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रेख़्ता शब्दकोश
navaa-e-anaa-al-haq
नवा-ए-अना-अल-हक़ نَوائے اَنا الحَق
मंसूर हल्लाज की अहं ब्रहास्मि की घोषणा
ham-sar-e-in'aam
हम-सर-ए-इन'आम ہَمْ سَرِ اِنْعَامْ
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नज़्म
मुझे जाना है इक दिन
कोई दम में हयात-ए-नौ का फिर परचम उठाता हूँ
ब-ईमा-ए-हमिय्यत जान की बाज़ी लगाता हूँ
असरार-उल-हक़ मजाज़
ग़ज़ल
तेरी ख़ातिर ऐ दिल-ए-बेताब हैं बर्बाद हम
फिर रहे हैं मारे मारे चार-सू नाशाद हम
अनवारुल हक़ अहमर लखनवी
ग़ज़ल
हक़ तो ये है कि मुझे अपने ही दिल ने लूटा
कुछ तिरा शिकवा-ए-बेदाद करूँ या न करूँ
