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ग़ज़ल
वो उफ़ुक़ पर जो उजाले से नज़र आते हैं
आमद-ए-सुब्ह-ए-दरख़्शाँ की ख़बर देते हैं
मंशाउर्रहमान ख़ाँ मंशा
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नज़्म
एक तस्वीर
दर्द की रात वही कर्ब का एहसास वही
आमद-ए-सुब्ह-ए-तमन्ना का गुमाँ क्या गुज़रे
मुस्लिम शमीम
नज़्म
एक तस्वीर
दर्द की रात वही कर्ब का एहसास वही
आमद-ए-सुब्ह-ए-तमन्ना का गुमाँ क्या गुज़रे
मुस्लिम शमीम
नज़्म
मिरे हमदम मिरे दोस्त!
आमद-ए-सुब्ह के, महताब के, सय्यारों के गीत
तुझ से मैं हुस्न-ओ-मोहब्बत की हिकायात कहूँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
'फ़ज़ा' है ख़ालिक़-ए-सुब्ह-ए-हयात फिर भी ग़रीब
कहाँ कहाँ न उफ़ुक़ की तलाश में डूबा
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल
यादों की शब ये कहती है अनवार-ए-सुब्ह से
ज़िंदा नुक़ूश होंगे तसलसुल को तोड़ दो
औलाद-ए-रसूल क़ुद्सी
ग़ज़ल
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
नज़्म
उजाले की लकीर
इक नई सुब्ह-ए-दरख़्शाँ का रूपहला आँचल
अपने हमराह लिए अज़्म-ए-जवाँ की तनवीर
नूर-ए-शमा नूर
ग़ज़ल
फैला हुआ है बाग़ में हर सम्त नूर-व-सुब्ह
बुलबुल के चहचहों से है ज़ाहिर सुरूर-ए-सुब्ह
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
शेर
पौ फटते ही 'रियाज़' जहाँ ख़ुल्द बन गया
ग़िल्मान-ए-महर साथ लिए आई हूर-ए-सुब्ह
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
शेर
बद-क़िस्मतों को गर हो मयस्सर शब-ए-विसाल
सूरज ग़ुरूब होते ही ज़ाहिर हो नूर-ए-सुब्ह
