aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "aish-e-betaabii"
है जबीं ख़ाक पे और 'अर्श-ए-मु'अल्ला पे दिमाग़नक़्शा आँखों में तिरे दर का खिंचा होता है
कुछ ऐसे की है अदा रस्म-ए-बंदगी मैं नेगुज़ार दी तिरे वा'दे पे ज़िंदगी मैं ने
है 'ऐश' साथ कोई राहबर न हमराहीकटेगी देखिए तन्हा रह-ए-वफ़ा कैसे
ताब-ए-नज़ारा-ए-रुख़-ए-अनवर नहीं उसेसूरज की सम्त रुख़ है गुल-ए-आफ़्ताब का
ग़ैरों की तरह मुँह तकते रहे हर एक का हम इस महफ़िल मेंआँखों में छलक आए आँसू फिर ज़ब्त का यारा हो न सका
न मिलने पर भी उसे 'ऐश' प्यार करता हूँयूँ ऊँचा कर दिया मेआ'र-ए-ज़िंदगी मैं ने
रोना तो है बस उस की महरूमी-ए-क़िस्मत काये दौलत-ए-ग़म जिस की तक़दीर नहीं होती
कैसी उजड़ी है ये महफ़िल 'ऐश' हंगाम-ए-सहरशम-ए-कुश्ता है कहीं और ख़ाक-ए-परवाना कहीं
कुल्फ़त-ए-अफ़्सुर्दगी को ऐश-ए-बेताबी हरामवर्ना दंदाँ दर दिल अफ़्शुर्दन बिना-ए-ख़ंदा है
बहुत है ख़ेमा-ए-गर्दूं के फूँकने को तो 'ऐश'इस आह-ए-तुफ़्ता जिगर में असर हज़ार न हो
ये नाले वो हैं याद रहे तू न गर मिलापहुँचेंगे ता-ब अर्श-ए-बरीं तेरे वास्ते
जो होता आह तिरी आह-ए-बे-असर में असरतो कुछ तो होता दिल-ए-शोख़-ए-फ़ित्नागर में असर
रहम ऐ चश्म बनाया है कहीं क्या दिल कोक़तरा-ए-अश्क हो मिज़्गाँ से टपकने के लिए
सई-ए-बे-फ़ाएदा है चारागरोमरज़-ए-इश्क़ की दवा ही नहीं
वाइज़ो बंदा-ए-ख़ुदा तो है 'ऐश'हम ने माना वो पारसा न सही
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