aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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वही नागिन का कल तक ज़िक्र था सारे ज़माने मेंउसी को अब 'असर' कहते हैं अपना कर लिया मैं ने
गहरी अनजानी पाताल की अंधी तह मेंअँधियारों के देव छुपे हैं
मोहब्बत में ठनी अक्सर यहाँ तककि पहुँचे मारके तीर ओ कमाँ तक
ना-मुरादी का रक़्स जारी हैज़िंदगी पर जुमूद तारी है
सर-ए-नियाज़ झुकाना कोई मज़ाक़ नहींअना-ए-क़ल्ब मिटाना कोई मज़ाक़ नहीं
Anar Kali
सय्यद इम्तियाज़ अली ताज
रोमांनवी
अनार कली
Chacha Chhakkan Ki Ainak Khoi Gayi
इस्मत चुग़ताई
कहानी
Chacha Chhakkan Ki Ainak Khoi Gyi
धूल ही धूल अड़ी है मुझ मेंसब्ज़ इक शाख़ जली है मुझ में
दूरियों की धुँद में गुमहो चुका है कारवाँ अब
क़ज़ा हर पल खड़ी हैअना फिर भी बड़ी है
फ़क़्र के हैं मो'जिज़ात ताज ओ सरीर ओ सिपाहफ़क़्र है मीरों का मीर फ़क़्र है शाहों का शाह
ख़िज़ाँ हो ज़लज़ला हो या भँवर होमिरे जज़्बात का कुछ तो असर हो
हमारे ज़ेहन पे तारी है बेबसी अब तककि पूरी हो नहीं पाई तिरी कमी अब तक
किस के आँगन से गुज़र कर ये हवा आती हैसिसकियाँ लेती हुई बू-ए-हिना आती है
रात जब हर चीज़ को चादर उढ़ा देढाँप ले काले परों में
कड़ी धूप में साया-आवर बहुत हैमिरी माँ का आँचल है सर पर बहुत है
जब भी मौज़ू’-ए-सुख़न अपने असर तक पहुँचेमोड़ दो बात अगर तीर-ओ-तबर तक पहुँचे
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