आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "bazm-e-jahaa.n"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "bazm-e-jahaa.n"
ग़ज़ल
निगार-ख़ाना-ए-बज़्म-ए-जहाँ की बात करो
शराब-ओ-सब्ज़ा-ओ-आब-ए-रवाँ की बात करो
मुमताज़ अहमद ख़ाँ ख़ुशतर खांडवी
नज़्म
रुख़्सत ऐ बज़्म-ए-जहाँ
رخصت اے بزم جہاں! سوئے وطن جاتا ہوں ميں
آہ! اس آباد ويرانے ميں گھبراتا ہوں ميں
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
एक नग़्मा करबला-ए-बैरुत के लिए
और ताबाँ है अर्ज़-ए-लबनाँ
बैरूत निगार-ए-बज़्म-ए-जहाँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
पुस्तकें के संबंधित परिणाम "bazm-e-jahaa.n"
अन्य परिणाम "bazm-e-jahaa.n"
नज़्म
शमा
बज़्म-ए-जहाँ में में भी हूँ ए शम-ए-दर्दमंद
फ़र्याद दर गिरह-ए-सिफ़त दाना सिपंद
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
बज़्म-ए-जहान-ए-शौक़ का मेहवर भी मैं ही था
औराक़-ए-दिल पे हर्फ़-ए-मुकर्रर भी मैं ही था
सहरताब रूमानी
शेर
मुग़ीसुद्दीन फ़रीदी
ग़ज़ल
मैं 'बज़्म' सोज़-ए-तग़ाफ़ुल से जल बुझा लेकिन
उसे न ज़हमत-ए-फ़िक्र-ओ-ख़याल दी मैं ने
बज़्म अंसारी
ग़ज़ल
ज़बाँ से कर के इज़हार-ए-हक़ीक़त आफ़रीं मैं ने
ज़माने भर को अपना कर लिया है नुक्ता-चीं मैं ने
बज़्म अंसारी
ग़ज़ल
वो 'उम्र 'बज़्म' कि जिस का सुराग़ ही न मिला
उस उम्र-ए-रफ़्ता की इक यादगार दिल ही तो है
बज़्म अंसारी
ग़ज़ल
गुरेज़ 'बज़्म' ज़रूरी है इल्तिफ़ात में भी
हो रस्म-ओ-राह तो हद से कभी बढ़ूँ भी नहीं