आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "bazm-e-saama.ii.n"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "bazm-e-saama.ii.n"
ग़ज़ल
मैं 'बज़्म' सोज़-ए-तग़ाफ़ुल से जल बुझा लेकिन
उसे न ज़हमत-ए-फ़िक्र-ओ-ख़याल दी मैं ने
बज़्म अंसारी
ग़ज़ल
मोहब्बत ज़िंदगी है 'बज़्म' लेकिन लोग कहते हैं
कि जाम-ए-ज़हर को समझा है जाम-ए-अंगबीं मैं ने
बज़्म अंसारी
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
रेख़्ता शब्दकोश
baazuu TuuTe baaz ko saa.ii.n to'ma de
बाज़ू टूटे बाज़ को साईं तो'मा दे بازُو ٹُوٹے باز کو سائِیں طُعْمَہ دے
अपने पाले हुए की पालने वाले ही को मुहब्बत होती है
saa.ii.n se saa.nchii rahuu.n baaj baaj re Dhol, panchan me.n merii pat rahe sakhiyaa.n me.n rahe bol
साईं से सांची रहूँ बाज बाज रे ढोल, पंचन में मेरी पत रहे सखियाँ में रहे बोल سائِیں سے سانچی رَہوں باج باج رے ڈھول، پَنچَن میں میری پَت رہے سکھیاں میں رہے بول
स्त्री को चाहिए कि पति की नज़रों में सच्ची रहे क्यूँकि इसी तरह लोगों में उस का सम्मान और सहेलियों में उस का महत्व होता है
अन्य परिणाम "bazm-e-saama.ii.n"
ग़ज़ल
गुरेज़ 'बज़्म' ज़रूरी है इल्तिफ़ात में भी
हो रस्म-ओ-राह तो हद से कभी बढ़ूँ भी नहीं
बज़्म अंसारी
ग़ज़ल
वो 'बज़्म' जो दिल-ओ-जाँ से 'अज़ीज़ था हम को
उसी 'अज़ीज़ ने दी हैं अज़िय्यतें क्या क्या
बज़्म अंसारी
ग़ज़ल
बज़्म से उस की चले आओ जो बिगड़ा वो बुत
बैठने को कोई फ़िक़रा भी बनाया न गया
आशिक़ हुसैन बज़्म आफंदी
ग़ज़ल
पढ़ी ऐ 'बज़्म' जब मैं ने ग़ज़ल कट कट गए हासिद
रही हर मा'रका में तेज़ शमशीर-ए-ज़बाँ मेरी
आशिक़ हुसैन बज़्म आफंदी
ग़ज़ल
ऐ 'बज़्म' उठा करता है क्यों दर्द जिगर में
सच कह किसे देखा कि तबीअत नहीं अच्छी
आशिक़ हुसैन बज़्म आफंदी
ग़ज़ल
निवाला मुँह का नहीं फ़न्न-ए-शाइरी ऐ 'बज़्म'
ये काम वो है कि जो उम्र भर नहीं आता
आशिक़ हुसैन बज़्म आफंदी
ग़ज़ल
अदू की बज़्म में ऐ 'बज़्म' ये शब तो बसर कर लो
अगर देखा नहीं जाता तो मुँह अपना उधर कर लो
आशिक़ हुसैन बज़्म आफंदी
ग़ज़ल
औसाफ़-ए-क़द-ए-यार भी मौज़ूँ करो ऐ 'बज़्म'
क्यों नूर का मिसरा रहे दीवान से बाहर
आशिक़ हुसैन बज़्म आफंदी
ग़ज़ल
आरज़ू है 'बज़्म' की ख़ालिक़ वो दिन लाए कहीं
मर्सिया जा कर पढ़ूँ मैं रौज़ा-ए-शब्बीर में