aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "be-sabab"
कलाम साहब बी.ए
अनुवादक
बे-सबब कौन ख़ून रोता हैदर्द सा एक दिल में होता है
ख़्वाह-मख़ाह बे-सबब लुटाई हुई'उम्र भी बाप की कमाई हुई
बे-सबब मुस्कुरा रहा है चाँदकोई साज़िश छुपा रहा है चाँद
बे-सबब ग़म ज़ियादा मंज़ूर हैमैं इन ग़म के लम्हों को ख़ुशी ख़ुशी निभा लूंगा
आज़ुर्दा हो गया वो ख़रीदार बे-सबबदिल बेच कर हुआ मैं गुनहगार बे-सबब
लखनवी शाइ’री की तीसरी पीढ़ी के प्रमुख प्रतिनिधि शाइ’र। ख़्वाजा ‘आतिश’ के लाइक़ शागिर्द थे। अफ़ीम का शौक़ था, ख़ुद खाते और मेहमानों को खिलाते। वाजिद अ’ली शाह ने दो सौ रुपए माहवार वज़ीफ़ा बाँध रखा था, जिससे ऐश में गुज़रती थी।
ब-सबब بَسَبَب
कारण से
ब-सबब بَہ سَبَب
शबाब के दिन شَباب کے دِن
जवानी का ज़माना
बा-सवाब با صَواب
सत्य और अच्छाई के आधार पर, सही, ठीक (आमतौर पर राय या जवाब आदि के लिए उपयोग किया जाता है)
Be Sabab
इफ़्फ़त ज़र्रीं
Jawab-e-Ba-Sawab
अननोन ऑथर
इस्लामियात
Muslim Khawateen Ke Liye Bees Sabaq
मोहम्मद अाशिक़ इलाही
विज्ञान माला
मास्टर रामचन्द्र
Pa Ba Jaulan
नईम सबा
काव्य संग्रह
Aatish-e-Be-Nam
मुज़फ़्फ़रुद्दीन ख़ाँ साहब
ग़ज़ल
Karishma-e-Shabab
एच. एम. हैरान
Risala Musamma Ba Mushtahir-al-Faiz
Munshi Gobind Lal Saba
Irani Kok Shastr
अज़मत अली हसरत लखनवी
Sarab-e-Fashion
मिर्ज़ा अब्बास बेग महशर
नॉवेल / उपन्यास
Deputy Nazeer Ahmad Sahab Ki Kahani
मिर्ज़ा फ़रहतुल्लाह बेग
जीवनी
Iltimas Be Huzur-e-Janab-e-Nawwab Sahab Bahadur Wali-e-Rampur
सैयद महमूद शाह
शाहराह-ए-ज़िंदगी
रामस्वरूप कौशल
Shajra Ba-Samra Sayyad Ahmad Sahab
वीलायत अली सादिक़पूरी अज़ीमाबादी
नक्शबंदिया
Prof Wilson Sahab ka Risaala-e-Amraz
आर. बी. एस. भंडारी
बे-सबब ख़ामुशी नहीं ओढ़ीतेरी आँखों का हुक्म माना है
ख़फ़ा हम से वो बे-सबब हो गयाग़ज़ब हो गया है ग़ज़ब हो गया
वो बुत बे-सबब क्यों ख़फ़ा हो गयाख़ुदावंद-ए-आलम ये क्या हो गया
कमर ख़मीदा नहीं बे-सबब ज़ईफ़ी मेंज़मीन ढूँडते हैं वो मज़ार के क़ाबिल
बे-सबब ग़ुंचे चटकते नहीं गुलज़ारों मेंफिर रहा है ये ढिंढोरा तिरी रानाई का
बे-सबब चाक पर धरे थे हमबनते बनते भी क्या बने थे हम
बे-सबब बात बढ़ाने की ज़रूरत क्या हैहम ख़फ़ा कब थे मनाने की ज़रूरत क्या है
बे-सबब ख़ौफ़ से दिल मेरा लरज़ता क्यूँ हैबात-बे-बात यूँही ख़ुद से उलझता क्यूँ है
बे-सबब जी से गुज़रना नहीं अच्छा होतामौत से पहले भी मरना नहीं अच्छा होता
कभी बे-सबब तुम रुला कर तो देखोमुझे मेरी जाँ आज़मा कर तो देखो
यकायक और बज़ाहिर बे-सबबशाने पे उस ने हाथ क्या रख्खा
एक बच्चा सा बे-सबब 'जाज़िल'बैठा रहता है रूठ कर मुझ में
ये मै-कश बे-सबब तन्हा खड़े हैंतो फिर ये जाम क्यों सारे भरे हैं
बे-ख़ुदी बे-सबब नहीं 'ग़ालिब'कुछ तो है जिस की पर्दा-दारी है
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books