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ग़ज़ल
अज़-बस वो सियह-कार-ए-हया हूँ मैं तह-ए-ख़ाक
गाहे मिरे मरक़द में उजाला नहीं होता
मिर्ज़ा रहीमुद्दीन हया
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havaa se baat karnaa
हवा से बात करनाہَوا سے بات کَرنا
रुक : हुआ से बातें करना जो फ़सीह है , किसी चीज़ का निहायत तेज़ चलना , (सवारी का) बहुत तेज़ रफ़्तारी से चलना या उड़ना, तेज़ तेज़ चलना , (शाज़) अटखेलीयां करना, आवारागर्दी करना
KHurd-biinii-e-hayaat
ख़ुर्द-बीनी-ए-हयातخُرْد بِینیِ حَیات
Microbiology.
mu.nh se baat niklii havaa me.n phirii
मुँह से बात निकली हवा में फिरीمُنہ سے بات نِکلی ہَوا میں پِھری
बात कहने के बाद प्रसिद्ध हो जाती है
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ग़ज़ल
घर में जाती नहीं पहचानी तिरी शक्ल 'हया'
उस पे हसरत कि दर-ए-यार पे बिस्तर न हुआ
मिर्ज़ा रहीमुद्दीन हया
ग़ज़ल
हुआ है सीने में शायद जिगर दो पारा 'हया'
बजाए अश्क जो आँखों से ख़ून-ए-नाब आया
मिर्ज़ा रहीमुद्दीन हया
ग़ज़ल
लिखा जो यार को मज़मून-ए-वस्ल का काग़ज़
हवा-ए-शौक़ में फिर कर हवा हुआ काग़ज़
मिर्ज़ा रहीमुद्दीन हया
ग़ज़ल
रू-सियह ही सिफ़त-ए-नक़्श-ए-नगीं रखता है
ख़ूब रौशन है 'हया' बख़्त-ए-सियहकार अपना
मिर्ज़ा रहीमुद्दीन हया
ग़ज़ल
वो शोख़ पुर-जफ़ा-ओ-सितम और ख़ुदा का डर
रखते हैं अपने दिल में 'हया' क्या गुमान आप
मिर्ज़ा रहीमुद्दीन हया
ग़ज़ल
वो सितम-पेशा कहाँ शर्म-ओ-हया रखते हैं
हम ग़रीबों पे हर इक ज़ुल्म रवा रखते हैं
