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ग़ज़ल
है जिन्हें सब से ज़ियादा दा'वा-ए-हुब्बुल-वतन
आज उन की वज्ह से हुब्ब-ए-वतन रुस्वा तो है
साहिर लुधियानवी
नज़्म
लब पे पाबंदी तो है
है जिन्हें सब से ज़ियादा दावा-ए-हुब्बुलवतन
आज उन की वज्ह से हुब्ब-ए-वतन रुस्वा तो है
साहिर लुधियानवी
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नज़्म
स्वदेशी तहरीक
वतन के दर्द-ए-निहाँ की दवा सुदेशी है
ग़रीब क़ौम की हाजत-रवा सुदेशी है
तिलोकचंद महरूम
ग़ज़ल
निगाह-ओ-दिल से गुज़री दास्ताँ तक बात जा पहुँची
मिरे होंटों से निकली और कहाँ तक बात जा पहुँची
अनवर साबरी
ग़ज़ल
क़िस्मत में हैं बर्बादियाँ याद-ए-वतन से क्या ग़रज़
मैं फूल हूँ टूटा हुआ मुझ को चमन से क्या ग़रज़
नाज़िश बदायूनी
नज़्म
मुसव्विर का हाथ
कभी माँ की दवा बहनों की शादी
कभी याद-ए-वतन की चाशनी विस्की की कड़वाहट
अतहर राज़
नज़्म
'चकबस्त'
हुब्ब-उल-वतनी उस के लिए शान-ए-बशर है
जो सुब्ह वतन में हो वो जन्नत की सहर है
फ़ातिमा वसीया जायसी
ग़ज़ल
बे-ख़ुद हैं तेरे जल्वा-ए-तौबा-शिकन से हम
हैं बे-नियाज़ बादा-ए-रंज-ओ-मेहन से हम
साहबज़ादा मीर बुरहान अली खां कलीम
ग़ज़ल
मुसलसल ख़ौफ़ है अब तो कहीं ऐसा न हो जाए
मिरी अर्ज़-ए-वतन मेरे लिए बर्मा न हो जाए