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नज़्म
सदा ब-सहरा
ये इक आसूदगी चेहरे पे ये ठहराव आँखों में
ये अश्कों से भरी छागल ये बे-पर्दा-ओ-ख़ुद-सर दिल
शफ़ीक़ फातिमा शेरा
ग़ज़ल
जहाँ में है ज़बान-ए-ख़ल्क़ पर हर-दम बुत-ए-ख़ुद-सर
जफ़ा तेरी वफ़ा मेरी सितम तेरा फ़ुग़ाँ मेरी
सय्यद अनीसुद्दीन अहमद रीज़वी अमरोहवी
नज़्म
ज़िंदगी
क़ौल-ए-ख़ुद-सर था कि ताक़त का नशा है ज़िंदगी
इक क़रीब-उल-मर्ग बोला ख़्वाब सा है ज़िंदगी
शाहीन भट्टी
ग़ज़ल
मिरे सीने में दिल है या कोई शहज़ादा-ए-ख़ुद-सर
किसी दिन उस को ताज-ओ-तख़्त से महरूम कर देखूँ
सरवत हुसैन
ग़ज़ल
फ़ैज़-ए-उस्ताद से ख़ाली नहीं कोई शाइ'र
यूँ तो महफ़िल में बहुत ‘शाइ'र’-ए-ख़ुद-सर देखे
