आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "daur-e-nargis-e-mastaana"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "daur-e-nargis-e-mastaana"
ग़ज़ल
यहाँ भी कुछ निगाहें तिश्ना-ए-दीदार हैं साक़ी
इधर भी एक दौर-ए-नर्गिस-ए-मस्ताना हो जाए
माहिर-उल क़ादरी
ग़ज़ल
वाह क्या फ़ैज़ान-ए-चश्म-ए-नर्गिस-ए-मस्ताना था
जिस तरफ़ नज़रें उठीं मय-ख़ाना ही मय-ख़ाना था
मोहम्मद मूसा
नज़्म
नर्गिस-ए-मस्ताना
अपना ही सा ऐ नर्गिस-ए-मस्ताना बना दे
मैं जब तुझे जानूँ मुझे दीवाना बना दे
जिगर मुरादाबादी
अन्य परिणाम "daur-e-nargis-e-mastaana"
ग़ज़ल
कुछ ऐसा है फ़रेब-ए-नर्गिस-ए-मस्ताना बरसों से
कि सब भूले हुए हैं का'बा-ओ-बुत-ख़ाना बरसों से
इक़बाल सुहैल
ग़ज़ल
मैं तो फ़िदा-ए-नर्गिस-ए-मस्ताना हो गया
पैमाना से दिल अब मिरा मय-ख़ाना हो गया
अब्बास अली ख़ान बेखुद
ग़ज़ल
नज़्र-ए-निगाह-ए-नर्गिस-ए-मस्ताना हो गया
आया था शैख़ ख़िर्क़ा-ए-तक़्वा लिए हुए

