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ग़ज़ल
मेरे नालों से लरज़ता था कभी चर्ख़-ए-कुहन
अब तो फ़रियाद-ओ-फ़ुग़ाँ करने की ताक़त भी नहीं
नरेश एम. ए
ग़ज़ल
बुलबुल न बाज़ आइयो फ़रियाद-ओ-आह से
कब तक न होगी क़ल्ब-ए-गुल-ए-तर को इत्तिलाअ
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
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ग़ज़ल
हर चीज़ की गिरानी ने वीरान कर दिया
सर्फ़-ए-ख़िज़ाँ है हिन्द का गुलज़ार आज-कल
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
नज़्म
कुछ दे इसे रुख़्सत कर
इस बात पे क्यूँ इस की इतना भी हिजाब आए
फ़रियाद से बे-बहरा कश्कोल से ख़ाली है
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
वालिदा मरहूमा की याद में
क़ाफ़िले में ग़ैर फ़रियाद-ए-दिरा कुछ भी नहीं
इक मता-ए-दीदा-ए-तर के सिवा कुछ भी नहीं
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
वफ़ा-ए-दिलबराँ है इत्तिफ़ाक़ी वर्ना ऐ हमदम
असर फ़रियाद-ए-दिल-हा-ए-हज़ीं का किस ने देखा है
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
कोई नाला कोई गिर्या कोई आँसू कोई आह
कोई फ़रियाद-ए-अलम-अंगेज़ ला-हासिल नहीं
सय्यद ग़ाफ़िर रिज़वी फ़लक छौलसी
नज़्म
रामायण का एक सीन
सुन कर ज़बाँ से माँ की ये फ़रियाद-ए-दर्द-ख़ेज़
उस ख़स्ता-जाँ के दिल पे चली ग़म की तेग़-ए-तेज़
चकबस्त बृज नारायण
नज़्म
ए'तिराफ़
क्या सुनोगी मिरी मजरूह जवानी की पुकार
मेरी फ़रियाद-ए-जिगर-दोज़ मिरा नाला-ए-ज़ार
असरार-उल-हक़ मजाज़
ग़ज़ल
शब के सन्नाटे में चट्टानों को देखो ऐ 'ज़ेब'
तुम से बेगाना-ए-फ़र्याद-ओ-फ़ुग़ाँ और भी हैं
ज़ेब ग़ौरी
ग़ज़ल
गिर्या बे-तासीर ओ फ़रियाद-ए-दिल-ए-मुज़्तरिब ख़राब
कार-ए-इश्क़-ओ-आशिक़ी नाक़िस तमाम अक्सर ख़राब
अनवर देहलवी
नज़्म
जमुना
आह ओ शिकवा-तराज़-ए-दस्त बेदाद-ए-अजल
रो न ख़ून-ए-आरज़ू ओ महव-ए-फ़रियाद-ए-अजल