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ग़ज़ल
गुफ़्तुगू तू ने सिखाई है कि मैं गूँगा था
अब मैं बोलूँगा तो बातों में असर भी देना
मेराज फ़ैज़ाबादी
नज़्म
ख़्वाब जो बिखर गए
मगन था मैं कि प्यार के बहुत से गीत गाऊँगा
ज़बान गुंग हो गई, गले में गीत घुट गए
आमिर उस्मानी
ग़ज़ल
क़तील शिफ़ाई
ग़ज़ल
सई ओ तलाश बहुत सी रहेगी इस अंदाज़ के कहने की
सोहबत में उलमा फ़ुज़ला की जा कर पढ़िए गिनयेगा
मीर तक़ी मीर
नज़्म
इसी दो-राहे पर
और ये अहद किया था कि ब-ईं हाल-ए-तबाह
अब कभी प्यार भरे गीत नहीं गाऊँगा
साहिर लुधियानवी
नज़्म
मेरे गीत तुम्हारे हैं
तुम से क़ुव्वत ले कर अब मैं तुम को राह दिखाऊँगा
तुम परचम लहराना साथी मैं बरबत पर गाऊँगा
साहिर लुधियानवी
नज़्म
अलीगढ़ छोड़ने के ब'अद
गाऊँगा नग़्मे वो तामीर-ए-मोहब्बत के लिए
मय-कदा छोड़ दिया जिन की इशाअत के लिए