आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "gor-e-Gariibaa.n"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "gor-e-Gariibaa.n"
ग़ज़ल
बड़ी इबरत की मंज़िल है ज़मीं गोर-ए-ग़रीबाँ की
यहाँ अपनी हक़ीक़त पर नज़र पड़ती है इंसाँ की
मोहम्मद अब्बास सफ़ीर
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
पुस्तकें के संबंधित परिणाम "gor-e-Gariibaa.n"
अन्य परिणाम "gor-e-Gariibaa.n"
शेर
सबक़ आ के गोर-ए-ग़रीबाँ से ले लो
ख़मोशी मुदर्रिस है इस अंजुमन में
मिर्ज़ा मोहम्मद हादी अज़ीज़ लखनवी
नज़्म
गोर-ए-ग़रीबाँ
विदा-ए-रोज़-ए-रौशन है गजर शाम-ए-ग़रीबाँ का
चरा-गाहों से पलटे क़ाफ़िले वो बे-ज़बानों के
नज़्म तबातबाई
ग़ज़ल
तुम आ के क्या मुतबस्सिम हुए लहद पर मिरी
चराग़-ए-गोर-ए-ग़रीबाँ जला दिया तुम ने
जमीला ख़ातून तस्नीम
ग़ज़ल
आलम-ए-गोर-ए-ग़रीबाँ का ये ग़मनाक सुकूत
इक नमूना है मिरे दिल की शकेबाई का
मिर्ज़ा मोहम्मद हादी अज़ीज़ लखनवी
ग़ज़ल
'आशिक़ की तुर्बतों को मिटा कर ये कह दिया
लो अब निशान-ए-गोर-ए-ग़रीबाँ नहीं रहा
जमीला ख़ुदा बख़्श
ग़ज़ल
'अजब दुनिया-ए-हैरत आलम-ए-गोर-ए-ग़रीबाँ है
कि वीराने का वीराना है और बस्ती की बस्ती है
बेदम शाह वारसी
ग़ज़ल
ऐ सबा औरों की तुर्बत पे गुल-अफ़्शानी चंद
जानिब-ए-गोर-ए-ग़रीबाँ भी कभी आया कर
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
ग़ज़ल
कर्बला में या नजफ़ में चल के मर जाएँ 'मुनीर'
हिन्द में हम पहलू-ए-गोर-ए-ग़रीबाँ हों तो क्या