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शेर
तकलीफ़ न दे हम को तो गुल-गश्त-ए-चमन की
ख़ुद सीना तिरे दाग़ों से गुलशन है हमारा
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
ग़ज़ल
इब्न-ए-चमन है तेरी वफ़ाओं पे जाँ-निसार
अपना बना के तू ने मुकम्मल क्या मुझे
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
ग़ज़ल
अब भी है हम को अहल-ए-चमन बस उन्हीं से प्यार
इस दिल को बार बार दुखाने के बअ'द भी
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
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नज़्म
आस्तीन का साँप
है डर कैसा तुम्हारे हम-सफ़र जब अहल-ए-फ़न भी हैं
तुम्हारे साथ शा'इर भी हैं और इन में 'चमन' भी हैं
चमन सीतापुरी
ग़ज़ल
बनाया है जिन्हें मैं ने मोहब्बत के गुलाबों से
तर-ओ-ताज़ा वो गुल-दस्ते तुम्हारे नाम करती हूँ
समीना गुल
ग़ज़ल
'तश्ना' फ़ज़ा-ए-सुब्ह-ए-चमन में ख़ुमार है
लेकिन जो दिल की बात करूँ बे-क़रार है
हुमैरा गुल तिश्ना
अप्रचलित शेर
बहार-ए-शोख़-ओ-चमन-तंग-ओ-रंग-ए-गुल दिलचस्प
नसीम-ए-बाग़ से पा-दर हिना निकलती है
मिर्ज़ा ग़ालिब
शेर
रंग-ए-गुल-ए-शगुफ़्ता हूँ आब-ए-रुख़-ए-चमन हूँ मैं
शम-ए-हरम चराग़-ए-दैर क़श्क़ा-ए-बरहमन हूँ मैं
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
ग़ज़ल
रंग-ए-गुल-ए-शगुफ़्ता हूँ आब-ए-रुख़-ए-चमन हूँ मैं
शम-ए-हरम चराग़-ए-दैर क़श्क़ा-ए-बरहमन हूँ मैं