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ग़ज़ल
ज़ौक़-ए-वारफ़्ता की असनाम-गरी मिट न सकी
हाइल-ए-राह वही संग-ए-गिराँ है कि जो था
अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद
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रेख़्ता शब्दकोश
raat haTaa.ii ta.Dke aa.ii, bhuukh vednaa burii re bhaa.ii
रात हटाई तड़के आई, भूख वेदना बुरी रे भाई رات ہَٹائی تَڑکے آئی، بُھوکھ ویدنا بُری رے بھائی
raat haTaa.ii ta.Dke aa.ii, bhuuk bednaa burii e bhaa.ii
रात हटाई तड़के आई, भूक बेदना बुरी ए भाई رات ہَٹائی تَڑکے آئی، بُھوک بیدنا بُری اے بھائی
भूख बड़ी बला है हर समय लगी रहती है
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नज़्म
शहीद-ए-मिल्लत-ओ-वतन!
ग़ुबार-ए-रह तिरा है हर जवाँ को सुरमा-ए-नज़र
तिरे चराग़ से सहर की मिल गई हमें ख़बर
एस. ए. रहमान
ग़ज़ल
हिसाब-ए-दर्द तो यूँ सब मिरी निगाह में है
जो मुझ पे हो न सकीं वो नवाज़िशें लिखना
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
हास्य
न छेड़ ऐ शैख़ हम यूँही भले चल राह लग अपनी
तुझे तो बीवियाँ सूझी हैं हम बेज़ार बैठे हैं
ए. डी. अज़हर
शेर
न छेड़ ऐ शैख़ हम यूँही भले चल राह लग अपनी
तुझे तो बीवियाँ सूझी हैं हम बेज़ार बैठे हैं
ए. डी. अज़हर
ग़ज़ल
क़ब्र तक पहूँचा गए सारे अज़ीज़-ओ-अक़रिबा
आगे आगे फिर रफ़ीक़-ए-राह तन्हाई हुई