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ग़ज़ल
मैं ज़ियारत-गाह-ए-आगाही से लौट आया हूँ दोस्त
फूल लाया हूँ अलम के हदिया-ए-तबरीक में
अब्दुल अहद साज़
नज़्म
मुसाफ़िर
कहीं जुनूँ कहीं तहज़ीब के तमांचे हैं
सँभाल मेरा सुबुक हदिया-ए-ग़म-ए-इदराक
मुस्तफ़ा ज़ैदी
ग़ज़ल
हदिया-ए-गोश-ए-समाअत ही कोई पेश करे
कर्ब-ए-तख़्लीक़ में डूबी हुई आवाज़ हैं हम
प्रेम नारायण सक्सेना राज़
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ग़ज़ल
है वही दीवानगी अब भी वही शोरीदगी
जैब ओ दामन हदिया-ए-ख़ार-ए-बयाबाँ अब भी है
बशीरुद्दीन अहमद देहलवी
ग़ज़ल
साग़र-ए-मय पेश कर के शैख़ कहलाता हूँ मैं
हदिया-ए-अहक़र है ये गो आप के क़ाबिल नहीं