आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "harba-haa-e-bahaar"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "harba-haa-e-bahaar"
नज़्म
मुजस्समा
धुएँ के गहरे हिसार बाँधे
ख़ुदा-ए-मौसम ने हर्बा-हा-ए-बहार से मुझ को आज़माया
अज़ीज़ तमन्नाई
ग़ज़ल
हँस दिए ज़ख़्म-ए-जिगर जैसे कि गुल-हा-ए-बहार
मुझ पे माइल है बहुत नर्गिस-ए-शहला-ए-बहार
सुहैल काकोरवी
नज़्म
इक सितारा आदर्श का
तख़्त-ओ-ताज-ओ-मोहर-ए-शाही के निगहबाँ
हर्बा-हा-ए-आहन-ओ-फ़ौलाद
शफ़ीक़ फातिमा शेरा
अन्य परिणाम "harba-haa-e-bahaar"
नज़्म
लज़्ज़त-ए-ग़म
कर रही थी फ़स्ल-ए-गुल जब राज़-ए-क़ुदरत आश्कार
जब उगलती थी ज़मीं गंजीना-हा-ए-पुर-बहार
मिर्ज़ा मोहम्मद हादी अज़ीज़ लखनवी
नज़्म
शहर-ए-निगार
आज फिर ता-ब-चमन दर-ए-पय-ए-गुल-हा-ए-चमन
गुनगुनाता हुआ ज़ंबूर-ए-बहार आ ही गया
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
हुज़्न-ए-इंसान
वर्ना शब-हा-ए-ज़मिस्ताँ अभी बे-कार नहीं
और न बे-सूद हैं अय्याम-ए-बहार