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रेख़्ता शब्दकोश
kisht-e-Gam harii rahnaa
किश्त-ए-ग़म हरी रहनाکِشتِ غم ہری رہنا
हर समय ग़म ताज़ा रहना
haarii jiitii ek na maan.naa
हारी जीती ऐक न माननाہاری جِیتی ایک نَہ ماننا
किसी तरह से क़ाइल ना होना , मन-मानी करना , अपनी ज़िद पर उड़ा रहना
haarii jiitii ek nahi.n maan.naa
हारी जीती ऐक नहीं माननाہاری جِیتی ایک نَہیں ماننا
किसी तरह से क़ाइल ना होना , मन-मानी करना , अपनी ज़िद पर उड़ा रहना
harii phirii hil ga.ii, jalve ke vaqt Tal ga.ii
हरी फिरी हिल गई, जल्वे के वक्त टल गईہری پھری ہل گئی، جلوے کے وقت ٹل گئی
اس کے متعلق کہتے ہیں جو وقت پر ٹل جائے اور ویسے ہر وقت ساتھ رہے
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ग़ज़ल
हिसार-ए-हर्फ़-ओ--हुनर तोड़ कर निकल जाऊँ
कहाँ पहुँच के ख़याल अपनी वुसअ'तों का हुआ
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल
हर्फ़-ओ-अल्फ़ाज़-ओ-म’आनी के हिजाबों में न थी
बात चेहरों पर जो लिक्खी थी किताबों में न थी
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल
मुद्दतों के बाद फिर कुंज-ए-हिरा रौशन हुआ
किस के लब पर देखना हर्फ़-ए-दुआ रौशन हुआ
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
नज़्म
आख़िरी आदमी
चमकते हुए सब बुतों को मिटा दो
कि अब लौह-ए-दिल से हर इक नक़्श हर्फ़-ए-ग़लत की तरह मिट चुका है
फ़ख़्र-ए-आलम नोमानी
ग़ज़ल
वो हर्फ़-ए-आरज़ू जिस पर मुकम्मल ज़ब्त है अब तक
कहीं ऐसा न हो शर्मिंदा-ए-इज़हार हो जाए
