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ग़ज़ल
न हुआ नसीब क़रार-ए-जाँ हवस-ए-क़रार भी अब नहीं
तिरा इंतिज़ार बहुत किया तिरा इंतिज़ार भी अब नहीं
जौन एलिया
ग़ज़ल
वो चराग़-ए-जाँ कि चराग़ था कहीं रहगुज़ार में बुझ गया
मैं जो इक शो'ला-नज़ाद था हवस-ए-क़रार में बुझ गया
इरफ़ान सत्तार
ग़ज़ल
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
ग़ज़ल
दुख पहुँचे जो कुछ तुम को तुम्हारी ये सज़ा है
क्यूँ उस के 'हवस' 'आशिक़-ए-जाँबाज़ हुए तुम
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
ग़ज़ल
दिखाए रंज पीरी के अजल तेरे तग़ाफ़ुल ने
तुझे आना था पहले आह तू अंजाम कार आई
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
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ग़ज़ल
आश्ना कोई नज़र आता नहीं याँ ऐ 'हवस'
किस को मैं अपना अनीस-ए-कुंज-ए-तन्हाई करूँ
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
ग़ज़ल
गिरह साँसों में डाली है 'हवस' इफ़रात-ए-गिर्या ने
न आह-ए-ना-तवाँ आने को लब तक नर्दबाँ ढूँढे
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
ग़ज़ल
इस में ज़ियाँ है जान का सुनता है ऐ 'हवस'
ज़िन्हार बार-ए-इश्क़ न सर पर उठाइयो
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
शेर
आश्ना कोई नज़र आता नहीं याँ ऐ 'हवस'
किस को मैं अपना अनीस-ए-कुंज-ए-तन्हाई करूँ
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
ग़ज़ल
शायद मैं उसे देखूँ 'हवस' बा-लब-ए-ख़ंदाँ
जाता हूँ इस उम्मीद पे गिर्यां पस-ए-महमिल
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
ग़ज़ल
हर घड़ी तुम जो मलामत मुझे करते हो 'हवस'
आप मैं दाम-ए-मोहब्बत में फँसा तुम को क्या
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
ग़ज़ल
बज़्म-ए-हस्ती में तू बैठा है 'हवस' क्या ग़ाफ़िल
कुछ जो करना है तू कर उम्र चली जाती है
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
ग़ज़ल
काम अपना तो तमाम किया यास ने 'हवस'
जी इश्तियाक़-ए-ख़ंजर-ए-क़ातिल में रह गया
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
ग़ज़ल
क्यूँकर न 'हवस' जावे सदक़े फ़लक-ए-नीली
नीलम ही का सब गहना जब यार पहन निकले
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
ग़ज़ल
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
ग़ज़ल
जोड़ना उन का निहायत ऐ 'हवस' दुश्वार था
दिल के टुकड़े देख मेरे शीशागर ने क्या कहा
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
ग़ज़ल
सर्व-नशीं और हैं शाख़-नशीं गुल और हैं
क़ुमरी-ए-आशियाँ-ख़राब बुलबुल-ए-बे-वतन हूँ मैं
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
शेर
सहरा में 'हवस' ख़ार-ए-मुग़ीलाँ की मदद से
बारे मिरा ख़ूँ हर ख़स-ओ-ख़ाशाक को पहुँचा
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
शेर
हवस हम पार होएँ क्यूँकि दरिया-ए-मोहब्बत से
क़ज़ा ने बादबान-ए-कशती-ए-तदबीर को तोड़ा
मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस
ग़ज़ल
सहरा में 'हवस' ख़ार-ए-मुग़ीलाँ की मदद से
बारे मिरा ख़ूँ हर ख़स-ओ-ख़ाशाक को पहुँचा