आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "illat-e-darmaa.ndagii"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "illat-e-darmaa.ndagii"
ग़ज़ल
तमाम इल्लत-ए-दरमाँदगी है क़िल्लत-ए-शौक़
तपिश हुई पर-ए-पर्वाज़-ए-मुर्ग़-ए-जाँ के लिए
मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता
अन्य परिणाम "illat-e-darmaa.ndagii"
नज़्म
कहाँ जाओगे
और हर कुश्ता-ए-वामाँदगी-ए-आख़िर-ए-शब
भूल कर साअत-ए-दरमांदगी-ए-आख़िर-ए-शब
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शायरी के अनुवाद
तारीकी की यूरिश से दिल हार मान लेता है
हार की ये शर्म और ख़स्तगी-ओ-दरमांदगी की ये तौहीन
रबीन्द्र नाथ टैगोर
ग़ज़ल
पूछा जो मैं हकीम से इल्लत-ए-कुन-फ़काँ है कौन
सोच के उस ने ये कहा ग़ैर-ए-ख़ुदा कोई नहीं
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
ग़ज़ल
जिस पर सजाएँ ख़िलअत-ओ-आलात-ए-अस्करी
अम्बोह-ए-बुज़दिलांँ में वो जी-दार भी तो हो
ज़किया शैख़ मीना
नज़्म
पर्दों की सात परतें लाज़िम थीं
काएनाती तख़्लीक़ का राज़
आलात-ए-मौसीक़ी बेकार हैं