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ग़ज़ल
ज़ब्त-ए-ग़म से लाख अपनी जान पर बन आए है
हाँ मगर ये इज़्ज़त-ए-सादात तो रह जाए है
सय्यदा शान-ए-मेराज
ग़ज़ल
ये जो कहा कि पास-ए-इश्क़ हुस्न को कुछ तो चाहिए
दस्त-ए-करम ब-दोश-ए-ग़ैर यार ने रख दिया कि यूँ
एस ए मेहदी
शेर
दोनों हों कैसे एक जा 'मेहदी' सुरूर-ओ-सोज़-ए-दिल
बर्क़-ए-निगाह-ए-नाज़ ने गिर के बता दिया कि यूँ
एस ए मेहदी
ग़ज़ल
मैं बर्ग-ए-गुल से करूँगा मुक़ाबला उस का
सुना दो जा के ये क़ातिल को फ़ैसला मेरा
बद्र-ए-आलम ख़ाँ आज़मी
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रेख़्ता शब्दकोश
sharf-e-paa-bosii
शर्फ़-ए-पा-बोसीشَرْفِ پا بوسی
चरण चूमने का सम्मान, मुलाक़ात का सम्मान
paa-e-adab ko bosa denaa
पा-ए-अदब को बोसा देनाپائے اَدَب کو بُوسَہ دینا
किसी बुज़ुर्ग के चरण चूमना, किसी बुज़ुर्ग के पाँव चूमना
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ग़ज़ल
उफ़ ये तलाश-ए-हुस्न-ओ-हक़ीक़त किस जा ठहरें जाएँ कहाँ
सेहन-ए-चमन में फूल खिले हैं सहरा में दीवाने हैं
इब्न-ए-सफ़ी
ग़ज़ल
उन की बाँहों के हल्क़े में इश्क़ बना है पीर-ए-तरीक़
अब ऐसे में बताओ यारो किस जा कुफ़्र किधर ईमान
इब्न-ए-सफ़ी
ग़ज़ल
ख़ुशियाँ जा बैठीं कहीं ऊँची सी इक टहनी पर
दिल के बहलाने को इक लफ़्ज़-ए-क़ज़ा रक्खा है
इब्न-ए-उम्मीद
ग़ज़ल
इब्न-ए-इंशा
ग़ज़ल
तू भी हरे दरीचे वाली आ जा बर-सर-ए-बाम है चाँद
हर कोई जग में ख़ुद सा ढूँडे तुझ बिन बसे आराम है चाँद