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ग़ज़ल
जान-ए-बहार-ए-ज़िंदगी आँखें ज़रा मिलाए जा
गुलशन-ए-क़ल्ब पर मिरे बर्क़-ए-नज़र गिराए जा
नाज़िश सिकन्दरपुरी
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रेख़्ता शब्दकोश
aap se baahar ho jaanaa
आप से बाहर हो जाना آپ سے باہر ہو جانا
होश खो देना, अचेत हो जाना, बेसुद्ध
ghar aa.e piir na puuje baahar puujan jaa
घर आए पीर न पूजे बाहर पूजन जा گَھر آئے پِیر نَہ پُوجے باہَر پُوجَن جا
क़ाबू के वक़्त काम न करे फिर योजना बनाता फिरे, समय पर काम न करना फिर योजना करते फिरना, घर आई दौलत को छोड़कर दूसरी जगह तलाश करना
giida.D kii sau saala zindgii se sher kii aik dan kii zandgii bahtar he
गीदड़ की सौ सालह जिंदगी से शेर की एक दिन की जिंदगी बेहतर है گِیدَڑکی سَو سالہ زندگی سے شیر کی ایک دن کی زندگی بہتر ہے
कोई बड़ा कारनामा आदमी को हमेशा ज़िंदा रखता है चाहे वो उसे लम्बा जीवन प्राप्त न हुआ हो
jaan-e be-bahaa
जान-ए-बे-बहा جانِ بے بَہا
क़ीमती जान
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नज़्म
सुक़रात की बीवी
तंग आ के मुख़ातिब हुआ बीवी से वो इक रोज़
ऐ जान-ए-वफ़ा मुझ को बता सुन के मिरी बात
अमीर चंद बहार
ग़ज़ल
कब मिलता है सुख-चैन हमें कब ग़म से रिहाई होती है
हर वक़्त कलेजा फुंकता है लब पर जान आई होती है
अमीर चंद बहार
नज़्म
अफ़्कार परेशाँ
क्या बात है कि अब तिरे शे'रों में ऐ 'बहार'
वो सोज़ वो तड़प वो हरारत नहीं रही
अमीर चंद बहार
ग़ज़ल
ज़िंदगी के दश्त में आया न जब अक्स-ए-बहार
मैं ने ख़ुद को ख़ुद दिखाया वहशतों का सिलसिला