आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "jaan-e-bar"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "jaan-e-bar"
ग़ज़ल
जान आ बर में कि फिर कुछ ग़म-ओ-वसवास नहीं
तू नहीं पास तो फिर कुछ भी मिरे पास नहीं
मिर्ज़ा ज़हीरुद्दीन अज़फ़री
ग़ज़ल
रक़ीबाँ की न कुछ तक़्सीर साबित है न ख़ूबाँ की
मुझे नाहक़ सताता है ये इश्क़-ए-बद-गुमाँ अपना
मज़हर मिर्ज़ा जान-ए-जानाँ
समस्त
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "jaan-e-bar"
ग़ज़ल
मुद्दत हुई उस जान-ए-हया ने हम से ये इक़रार किया
जितने भी बदनाम हुए हम उतना उस ने प्यार किया
जाँ निसार अख़्तर
नज़्म
ख़ाक-ए-दिल
लखनऊ मेरे वतन मेरे चमन-ज़ार वतन
तेरे गहवारा-ए-आग़ोश में ऐ जान-ए-बहार