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नज़्म
बरसात का मौसम
ऐ हूर-ए-जिनाँ जान-ए-चमन रूह-ए-नज़ारा
ऐ पैकर-ए-अनवार-ओ-दिल-आवेज़ दिल-आरा
इज़हार मलीहाबादी
ग़ज़ल
जला है हाए किस जान-ए-चमन की शम-ए-महफ़िल से
महक फूलों की आती है शरार-ए-आतिश-ए-दिल से
एहसान दानिश कांधलवी
ग़ज़ल
अब भी है हम को अहल-ए-चमन बस उन्हीं से प्यार
इस दिल को बार बार दुखाने के बअ'द भी
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
ग़ज़ल
इब्न-ए-चमन है तेरी वफ़ाओं पे जाँ-निसार
अपना बना के तू ने मुकम्मल क्या मुझे
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
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रेख़्ता शब्दकोश
ujal baran adhiintaa ek charan do dhyaan, ham jaane tum bhagat ho nire kapaT kii khaan
उजल बरन अधीनता एक चरन दो ध्यान, हम जाने तुम भगत हो निरे कपट की खान اُجل برن ادھینتا ایک چرن دو دھیان، ہم جانے تم بھگت ہو نِرے کَپَٹ کی کھان
ujjval baran adhiintaa ek charan do dhyaan, ham jaane tum bhagat ho nire kapaT kii khaan
उज्ज्वल बरन अधीनता एक चरन दो ध्यान, हम जाने तुम भगत हो निरे कपट की खान اُجول برن ادھینتا ایک چرن دو دھیان، ہم جانے تم بھگت ہو نِرے کَپَٹ کی کھان
बगुला भगत अर्थात बाहर से कुछ एवं भीतर से कुछ, बाहर से अच्छा एवं भीतर से बुरा
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नज़्म
आस्तीन का साँप
बढ़ो ऐ भारती वीरो फिर अपनी साख मनवाओ
घटा बन कर उड़ो और उड़ के रन भूमी पे छा जाओ
चमन सीतापुरी
ग़ज़ल
कोई आज़ुर्दा करता है सजन अपने को हे ज़ालिम
कि दौलत-ख़्वाह अपना 'मज़हर' अपना 'जान-ए-जाँ' अपना
मज़हर मिर्ज़ा जान-ए-जानाँ
ग़ज़ल
मुद्दत हुई उस जान-ए-हया ने हम से ये इक़रार किया
जितने भी बदनाम हुए हम उतना उस ने प्यार किया
जाँ निसार अख़्तर
नज़्म
आलम कितने
जज़्ब होंगे अभी इस ख़ाक-ए-चमन में ऐ दोस्त
अश्क बन बन के गुहर-रेज़ा-ए-शबनम कितने
जाँ निसार अख़्तर
नज़्म
ख़ाक-ए-दिल
लखनऊ मेरे वतन मेरे चमन-ज़ार वतन
तेरे गहवारा-ए-आग़ोश में ऐ जान-ए-बहार
जाँ निसार अख़्तर
ग़ज़ल
ख़ुद इश्क़ क़ुर्ब-ए-जिस्म भी है क़ुर्ब-ए-जाँ के साथ
हम दूर ही से उन को पुकार आए ये नहीं