आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "jaanib-e-manzil"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "jaanib-e-manzil"
नज़्म
जश्न-ए-आज़ादी
जानिब-ए-मंज़िल हमारा कारवाँ बढ़ता गया
अम्न के परचम लिए हिन्दोस्ताँ बढ़ता गया
प्रेम लाल शिफ़ा देहलवी
ग़ज़ल
जानिब-ए-मंज़िल सफ़र में रौशनी सी है अभी
इस अँधेरी रात में भी चाँदनी सी है अभी
जतीन्द्र वीर यख़मी ’जयवीर
ग़ज़ल
छोड़ कर सब कुछ चला था जानिब-ए-मंज़िल जुनूँ
क्यों ख़िरद ने राह में रिश्तों के पत्थर रख दिए
शान-ए-हैदर बेबाक अमरोहवी
अन्य परिणाम "jaanib-e-manzil"
ग़ज़ल
ग़म-ए-दौराँ की रही या ग़म-ए-जानाँ की रही
अल-ग़रज़ छेड़ रही मंज़िल-ए-नाकाम के साथ
मंज़िल लोहाठेरी
ग़ज़ल
क़दम में जानिब-ए-मंज़िल बढ़ाऊँ क्या कि क़िस्मत ने
जहाँ आग़ाज़ लिक्खा था वहीं अंजाम लिक्खा है