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ग़ज़ल
ये तुम जो मुझ से ज़रा सी बातों पे रूठते हो
मैं सारी दुनिया से रूठ जाऊँगा देख लेना
नासिर अमरोहवी
नज़्म
लॉन्ग डिसटेन्स रिलेशनशिप
कुछ इस तरह तिरे चेहरे को हाथों में भर कर
तिरे लबों पे लबों से दिए जलाऊँगा
बालमोहन पांडेय
ग़ज़ल
पहले तो मैं ग़म के सारे दस्तावेज़ जलाऊँगा
बा'द में सोचूँगा मैं उन पर रोऊँ या फ़रियाद करूँ
शाहनवाज़ अंसारी
ग़ज़ल
आ के इक रोज़ जलाऊँगा मुरादों के दिए
तेरी महफ़िल में करूँगा मैं चराग़ाँ इक रोज़