आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "kashiid-e-koshish"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "kashiid-e-koshish"
अन्य परिणाम "kashiid-e-koshish"
ग़ज़ल
हमारे ज़ेहन-ओ-दिल में एक तूफ़ाँ है जो वहशत का
कशीद-ए-जाम-ओ-मय से भी ये बोहरानी नहीं जाती
अख़लाक़ आहन
ग़ज़ल
ग़म-ए-नाकामी-ए-कोशिश से हालत बिगड़ी जाती है
कलेजे में यहाँ बे-आग छाले पड़ते जाते हैं
मुज़्तर ख़ैराबादी
ग़ज़ल
हूँ चराग़ान-ए-हवस जूँ काग़ज़-ए-आतिश-ज़दा
दाग़ गर्म-ए-कोशिश-ए-ईजाद-ए-दाग़-ए-ताज़ा था
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
ख़त-ए-शिकस्ता में क्या जाने कब कशीद आ जाए
कि साँस रोक के करियो मियाँ किताबत-ए-इश्क़
कामरान नफ़ीस
ग़ज़ल
'अजब सर-गर्म-ए-कोशिश हो मुक़द्दर में जो होती है
तो हाथ इंसाँ के इक रोज़ दौलत आ ही जाती है