aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "kashish-e-dil"
है बे-असर ऐसी ही जो अपनी कशिश-ए-दिलजी ले ही के छोड़ेगी ये इक दिन ख़लिश-ए-दिल
माँग लाते 'कशिश' तबीबों सेदर्द-ए-दिल की अगर दवा होती
मंज़ूर शहर-ए-दिल में बसाना नहीं अगरफिर वो जगह बता दो ये 'आशिक़ जहाँ रहे
घर आए सारे दिन की थकन ले के ऐ 'कशिश'बच्चों को देखते ही नई ताज़गी मिली
राह-ए-हक़ में जो हर इक चीज़ लुटाता है 'कशिश'उस की झोली को ख़ुदा ग़ैब से भर देता है
काहिश-ए-दिलکاہِشِ دِل
decay, wasting, emaciation, consumption, wear and tear, care of heart
Kawish-e-Dil
सय्यद आशिक हुसैन आशिक
ख़ून-ए-दिल की कशीद
मिर्ज़ा ज़फ़रुल हसन
लेख
'कशिश' के सर पे था जब वालदैन का सायाकभी भी उन की दु'आ बे-असर नहीं आई
जो न आए थे पहले तसव्वुर में भीऐ 'कशिश' आज वो मेरे घर आ गए
तुम्हारे हुस्न-ए-फ़ुसूँ-कार ने जिला बख़्शीतुम्हारी चश्म-ए-मोहब्बत है मय-कशी के लिए
जिस की नज़रों ने लगाई है ये आतिश दिल मेंयाद भी उस की हमें बाद-ए-सबा लगती है
सुना है क़िस्सा-ए-ग़म जिस ने रोया है पैहम'अजीब दर्द 'कशिश' तेरी दास्तान में है
वो सँवरते वक़्त भी डरने लगे हैं ऐ 'कशिश'जैसे आँखों से कोई काजल उड़ा ले जाएगा
शायद कि मेरे शे'रों में कुछ बात है 'कशिश'पहचानने लगे हैं अब अहल-ए-नज़र मुझे
मिरी नज़र में ये तौहीन-ए-'आशिक़ी की हैनहीं है प्यार तो क्यों उस ने दिल-लगी की है
मेरी दास्तान-ए-ग़ज़ल ने अब मेरे ग़म सभी को बता दिएजो छुपा रही थी मैं अब तलक वही राज़-ए-दिल लो दिखा दिए
निकली है क़ैद-ए-अश्क से मुद्दत में ये 'कशिश'इस मरहले के बा'द ज़माने बदल गए
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