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ग़ज़ल
शकील बदायूनी
ग़ज़ल
कैसी मुसीबत है ये गुल को ख़मोशी का शौक़
बुलबुल-ए-बेताब को हर्ज़ा-सराई का इश्क़
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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कैसी मुसीबत है ये गुल को ख़मोशी का शौक़
बुलबुल-ए-बेताब को हर्ज़ा-सराई का इश्क़