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ग़ज़ल
किसी के ख़ंदा-ए-बे-जा का अब नहीं शिकवा
फ़ुग़ाँ भी दिल से निकलती नहीं फ़ुग़ाँ की तरह
मुनीर भोपाली
अप्रचलित ग़ज़लें
ہوئی ہیں آب شرم کوشش بے جا سے تدبیریں
عرق ریز تپش ہیں موج کے مانند زنجیریں
मिर्ज़ा ग़ालिब
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रेख़्ता शब्दकोश
jis kaa khaanaa us pe Gurraanaa
जिस का खाना उस पे ग़ुर्राना جِس کا کھانا اُس پَہ غُرّانا
जिससे फ़ायदा हो, उसी से झगड़ा करना अच्छा नहीं है
jal me.n base kodhnii aur chandaa base aakaas, jo jan jaa ke man base so jan taa ke paas
जल में बसे कोधनी और चंदा बसे आकास, जो जन जा के मन बसे सो जन ता के पास جل میں بسے کودھنی اور چندا بسے آکاس، جو جن جا کے من بسے سو جن تا کے پاس
कमल का फूल पानी में रहता है और चाँद आसमान पर, जो किसी के दिल में रहता है वो मानो उन के पास है
jal me.n base kamodnii aur chandaa base akaas, jo jan jaa ke man base so jan taa ke paas
जल में बसे कमोदनी और चंदा बसे अकास, जो जन जा के मन बसे सो जन ता के पास جل میں بسے کمودنی اور چندا بسے اَکاس، جو جن جا کے من بسے سو جن تا کے پاس
ThanDaa hai barf se bhii miiThaa hai jaise olaa, kuchh paas hai to de jaa nahii.n pii jaa raah-e-maulaa
ठंडा है बर्फ़ से भी मीठा हे जैसे ओला, कुछ पास है तो दे जा नहीं पी जा राह-ए-मौला ٹَھنْڈا ہے بَرْف سے بھی مِیٹھا ہے جَیسے اولا، کُچْھ پاس ہے تو دے جا نَہِیں پی جا راہِ مولا
सक़्क़ों अर्थात पानी पिलाने वालों की सदा
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ग़ज़ल
वो भूले जाते हैं तर्ज़-ए-जफ़ा-ए-बे-जा को
हम अपना ज़ोर-ए-वफ़ा आज़माए जाते हैं
अब्दुल मन्नान बेदिल अज़ीमाबादी
ग़ज़ल
ख़ंदा-ए-बे-ज़रर कहाँ ग़ुंचा-ओ-गुल से दर्स ले
फ़ितरत-ए-ज़िंदगी पे जा इशरत-ए-ज़िंदगी न देख
शहाब सर्मदी
नज़्म
फ़क़त हर्फ़-ए-तमन्ना क्या है
साँवले चेहरे पे वो कानों के बाले की दमक
नाज़-ए-बे-जा भी न था रुख़ पे तफ़ाख़ुर की झलक
असलम अंसारी
ग़ज़ल
तिरी चश्म-ए-तरब को देखना पड़ता है पुर-नम भी
मोहब्बत ख़ंदा-ए-बे-बाक भी है गिर्या-ए-ग़म भी
ज़हीर काश्मीरी
ग़ज़ल
नासेह जो ये नसीहत-ए-बे-जा न मैं सुनी
मा'ज़ूर रख तू मुझ को मिरा दिल बजा न था
