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ग़ज़ल
लाइक़-ए-दीद है फ़नकार के चेहरे का जमाल
शाख़-ए-अफ़्कार से जब कोई गुल-ए-तर उभरे
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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लाइक़-ए-दीद है फ़नकार के चेहरे का जमाल
शाख़-ए-अफ़्कार से जब कोई गुल-ए-तर उभरे