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नज़्म
मादर-ए-वतन का नौहा
मेरे बदन पर बैठे हुए गिध
मेरे गोश्त की बोटी बोटी नोच रहे हैं
हिमायत अली शाएर
नज़्म
उर्दू ज़बान
आज़ाद हिन्द में न मिला इस को कुछ मक़ाम
ये मादर-ए-वतन के शहीदों की जान है
हबीब अहमद अंजुम दतियावी
नज़्म
आमद-ए-साल-ए-नौ और बद-नसीब हिन्दी
ऐ मादर-ए-वतन के सपूतो बढ़े चलो
ये आज हो रहा है इशारा बहार का
आफ़ताब रईस पानीपती
नज़्म
हिन्दू मुसलमानों का इत्तिहाद
फ़रज़ंद हो हक़ीक़ी तुम मादर-ए-वतन के
परवान चढ़ रहे हो मेवों से इस चमन के
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
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नज़्म
हम बाग़बान सारे हिन्दोस्ताँ चमन है
हम बाग़बान सारे हिन्दोस्ताँ चमन है
बच्चे हैं इस के हम सब ये मादर-ए-वतन है
मोहम्मद शफ़ीउद्दीन नय्यर
नज़्म
उर्दू हिन्दी
हैं मादर-ए-वतन के लिए दोनों सीम-तन
माँ की नज़र में दोनों की है दीदनी फबन
रंगेशवर दयाल सक्सेना सूफ़ी
नज़्म
गुलहा-ए-अक़ीदत
अब यही कोशिश है दिल से ऐ मिरी अर्ज़-ए-वतन
तेरी पेशानी पे अब कोई शिकन आने न पाए
सय्यदा शान-ए-मेराज
ग़ज़ल
जो भी हैं सुब्ह-ए-वतन ही के परस्तारों में हैं
किन से हम ऐ शाम-ए-ग़ुर्बत तेरा अफ़्साना कहें
कँवल एम ए
ग़ज़ल
हर शख़्स मो'तरिफ़ कि मुहिब्ब-ए-वतन हूँ मैं
फिर 'अदलिया ने क्यूँ सर-ए-मक़्तल क्या मुझे
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
शेर
हर शख़्स मो'तरिफ़ कि मुहिब्ब-ए-वतन हूँ मैं
फिर अदलिया ने क्यूँ सर-ए-मक़्तल किया मुझे
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
ग़ज़ल
बड़े-बड़ों पे भी 'माजिद' ब-नाम-ए-अर्ज़-ए-वतन
जो ए'तिमाद था अल-क़िस्सा मुख़्तसर न रहा